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SOCIAL SCIENCE CLASS 10TH QUESTION PAPER 2018 (RBSE)
January 20, 2020
MATHS CLASS 10TH QUESTION PAPER 2018 (RBSE)
January 24, 2020

RAJASTHAN BOARD EXAMINATION, 2018

CLASS 10th

HINDI

समय: 3¼ घंटे                                                                                                                                                          अधिकतम अंक: 80


परीक्षाओं के लिए सामान्य निर्देश:-

1. सभी प्रश्न करने अनिवार्य हैं। 

2. सभी प्रश्नों के अंक प्रश्न के सामने अंकित हैं। 


खण्ड  – 1 

निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए:

कबीर ने समाज में रहकर समाज का बड़े समीप से निरीक्षण किय। समाज  में फैले बाह्याडंबर, भेदभाव, साम्प्रदायिकता आदि का उन्होंने पुष्ट-प्रमाण लेकर ऐसा दृढ़ विरोध किया कि किसी की हिम्मत नहीं हुई जो उनके अकाट्य तर्कों को काट सके। कबीर का व्यक्तित्व इतना ऊंचा था कि उनके सामने टिक सकने की हिम्मत किसी में नहीं थीं। इस प्रकार उन्होंने समाज तथा धर्म की बुराइयों को निकाल – निकालकर सबके सामने रखा। ऊंचा नाम रखकर संसार को ठगने वालों  के नकली चेहरों को सबको दिखाया, और दीन -दलितों को ऊपर उठाने का उपदेश देकर अपने व्यक्तित्व को सुधार कर सबके सामने एक महान आदर्श प्रस्तुत कर सिद्धांतो का निरूपण किया। कर्म, सेवा, अहिंसा तथा निर्गुण मार्ग का प्रसार किया। कर्म-काण्ड तथा मूर्तिपूजा का विरोध किया। अपनी सखियों, रमैनियो तथा शब्दों को बोलचाल की भाषा में रचकर सबके सामने एक विशाल ज्ञानमार्ग खोला। इस प्रकार कबीर ने समन्वयवादी दृटिकोण अपनाया और कथनी-करनी की एकता पर बल दिया। वे महान  युगदृष्टा, समाज -सुधारक तथा महान कवि थे। उन्होंने हिन्दू -मुस्लिम के बीच समन्वय की धारा प्रवाहित कर दोनों को ही शीतलता प्रदान की। 

 1. उपर्युक्त गद्यांश का उचित शीर्षक लिखिए।

 2. कबीर के व्यक्तित्व की क्या विशेषता थी ?

 3. धर्म के विषय में कबीर का क्या दृष्टिकोण था ? 

 

निम्नलिखित पद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए: 

ओ बदनसीब अन्धो ! कमजोर अभागो, 

अब तो खोलो नयन नींद से जागो। 

वह अघी ? बाहुबल का जो अपलापी है, 

जिसकी ज्वाला बुझ गई, वही पापी है।

जब तक प्रसन्न यह अनल सगुण हॅसते हैं,

है जहाँ खड्ग, सब पुण्य वही बसते है।

वीरता जहाँ पर नहीं, पुण्य का क्षय है,

वीरता जहाँ पर नहीं, स्वार्थ की जय है।

तलवार पुण्य की सखी, धर्म पालक है,

लालच पर अंकुश कठिन, लोभ सालक है। 

असि छोड़, भीरु बन जहाँ धर्म सोता है,

पावक प्रचण्ड वहाँ प्रकट होता है।  

4. भारतवासियो के प्रति कवि क्यों आक्रोशित है?  

5. पुण्य का क्षय एवं स्वार्थ का उदय कब होता है ?  

6. धर्म का पालक किस प्रकार से किया जा सकता है ? 

 

खण्ड – 2 

7. दिए गए बिंदुओं के आधार पर निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर लगभग 300 शब्दों में निबंधों लिखिए :

(क) समाचार-पत्रों का महत्व

(i) प्रस्तावना 

(ii) समाचार-पत्रों का वर्तमान स्वरूप 

(iii) समाचार-पत्रों का दायित्व

(iv) उपसंहार 

(ख़) राजस्थान में गहराता जल संकट 

(i) प्रस्तावना 

(ii) जल संकट के कारण 

(iii) जल संकट निराकरण के उपाय 

(iv) उपसंहार 

(ग) उपभोक्तावाद और भारतीय संस्कृति 

(i) प्रस्तावना  

(ii) पाश्चात्य संस्कृति का दुष्प्रभाव

(iii) उपभोक्तावाद, उदारवाद और आर्थिक सुधार

(iv) उपसंहार 

(घ) राष्ट्रिय विकास में महिलाओं की भागीदारी 

(i) प्रस्तावना व स्वरूप

(ii) राष्ट्र विकास में महिला भागीदारी की आवश्यकता

(iii) कामकाजी महिलाओं की समस्या व् उनका समाधान 

(iv) उपसंहार 

 

8. आपका नाम ईशांत है। आप लक्ष्मीनगर, जयपुर के है। आपके क्षेत्र में अक्सर अनियमित बिजली कटौती की समस्या रहती है। नियमित विधुत सप्लाई दिलाने हेतु मुख्य अभियंता ‘विधुत ’,जयपुर को एक शिकायती पत्र लिखिए।

अथवा 

स्वयं को रतलाम का पुस्तक विक्रेता दीपक मानते हुए पुस्तक महल, नई दिल्ली को नवीनतम पुस्तक सूची भेजने हेतु एक पत्र लिखिए।  

 

खण्ड – 3 

9. कर्म के आधार पर क्रिया के भेद बताते हुए उनकी परिभाषा लिखिए। 

 

10. “राधा ने मिठाई खाई।” वाक्य में निहित कारक, काल और वाच्य लिखिए।

 

11. बहुब्रीहि समास की सोदाहरण परिभाषा लिखिए। 

 

12. निम्नलिखित वाक्यों को शुद्ध करके लिखिए:

(क) धोबी ने अच्छे कपड़े धोए।  

(ख) सुदामा पक्के कृष्ण के मित्र थे।  

 

13. निम्नलिखित मुहावरों का अर्थ लिखिए: 

(क) बालू से तेल निकालना 

(ख) अंधे की लाठी होना 

 

14. ‘चट मंगनी पट ब्याह’ लोकोक्ति का अर्थ लिखिए। 

 

खण्ड – 4 

15. निम्नलिखित पद्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए:

सीत को प्रबल सेनापति कोपि चढ्यो दल,

निबल अनल गयो सुरि सियराइ कै।

हिम के समीर, तेई बरसैं विषम तीर,

रही है गरम भौन कोनन मैं जाइ कै।

धूमनैन बहै, लोग आगि पर गिरे रहै,

हिय सौ लगाई रहै नैक सुलगाई कै। 

मानो भीत जानि महा सीत तै पसरि पानि,

छतिया की छाँह राख्यो पाउक छिपाई कै। 

अथवा 

विशाल मंदिर की यामिनी में,

जिसे देखना हो दीपमाला।  

तो तारकागण की ज्योति उसका , 

पता अनूठा बता रही है 

प्रभो ! प्रेममय प्रकाश तुम हो, 

प्रकृति-पदमिनी के अंशुमाली। 

असीम उपवन के तुम हो माली

धरा बराबर बता रही है। 

जो तेरी होवे दया दयानिधि,

तो पूर्ण होता ही है मनोरथ

सभी ये कहते पुकार करके,

यही तो आशा दिला रही है।  

 

16. निम्नलिखित गद्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए: 

मियाँ  नूरे के वकील का अंत उनके प्रतिष्ठानुकूल इससे ज्यादा गौरवमय हुआ। वकील जमींन पर या ताक पर तो नहीं बैठ सकता। उसकी मर्यादा का विचार तो रखना ही होगा। दीवार में दो खूटिया गाड़ी गई। उन पर लकड़ी का एक पटरा रखा गया। पटरे पर कागज का कालीन बिछाया गया। वकील साहब राजा भोज की भांति सिंहासन पर विराजे। नूरे ने उन्हें पंखा झलना शुरू किया। अदालतों में खस की टट्टियाँ और बिजली के पँखे रखते है। क्या यहाँ मामूली पंखा भी न हो! कानून की गर्मी दिमाग पर चढ़ जाएगी कि नहीं। बाँस का पंखा आया और नूरे हवा करने लगे।  मालूम नहीं, पंखे की हवा से, या पंखे की चोट से वकील साहब स्वर्गलोक से मृत्युलोक में आ रहे और उनका माटी का चोला माटी में मिल गया। फिर बड़े ज़ोर -ज़ोर से मातम हुआ और वकील साहब की अस्थि घूरे पर डाल दी गई।  

अथवा 

एक उपवन को पाकर भगवान को धन्यवाद देते हुए उसका आनन्द नहीं लेना और बराबर इस चिंता में निमग्न रहना की इससे भी बड़ा उपवन क्यों नहीं मिला। यह एक ऐसा दोष है जिससे ईर्ष्यालु व्यक्ति का चरित्र भी भयंकर हो उठता है। अपने अभाव पर दिन -रात सोचते वह सृस्टि की प्रक्रिया को भूलकर विनाश में लग जाता है और अपनी उन्नति के लिए उद्यम करना छोड़कर वह दूसरों को हानि पहुँचाने को ही अपना श्रेष्ट कर्तव्य समझने लगता है। 

 

17. पहली कियां उपाव, दव दुसमण आमय दटै। 

      पचंड हुआं विस वाव, रोभा घालै राजिया।।

      उपर्युक्त सोरठे का भावार्थ लिखिए।   ( उत्तर सीमा 200 शब्द ) 

अथवा  

‘लक्ष्मण परशुराम संवाद’ पाठनुसार परशुराम की क्रोधाग्नि कैसे शांत हुई ? लिखिए।

 

18. ‘ वह तो बस आहुति देना ही अपना धर्म समझता है।’ 

             सागर के इस कथन का क्या अभिप्राय है ? ( उत्तर सीमा 200 शब्द) 

अथवा 

लोक संत पीपा ने निर्गुण भक्ति काव्यधारा में किस प्रकार योगदान दिया है? लिखिए।

 

निम्नलिखित प्रश्नों का उत्तर 40 से 50 शब्दों में दीजिए: 

19. गोपियाँ किस लालच से कृष्ण की दासी बन गई ?

 

20. ‘कल और आज’ कविता में नागार्जुन ने ऋतु चक्र का सजीव वर्णन किस प्रकार किया है? 

 

21. ‘कन्यादान’ कविता का मूल भाव अपने शब्दों में लिखिए 

 

22. ‘एक अद्भुत अपूर्व स्वप्न’ निबंध की भाषा-शैली पर अपने विचार लिखिए। 

 

23. ‘गौरा’ की मृत्यु का क्या कारण था ?

 

24. हामिद ने चिमटा खरीदने का ही निर्णय क्यों किया? 

 

प्रश्न संख्या 25 से 28 का उत्तर एक पंक्ति दीजिए : 

25. ‘दामिनी दमक, सुर चाप की चमक, स्याम’ 

           सेनापति की उक्ति पंक्तियो में किस ऋतु का वर्णन है? 

 

26. ‘मातृ – वन्दना’ कविता में कवि  ने अपने श्रम का श्रेय किसे दिया है? 

 

27. आध्यात्मिक दृष्टि से कन्याकुमारी का क्या महत्व है? 

 

28. परनिंदा के विषय में दादू ने क्या कहा है? 

 

29. निम्न रचनाओं का संक्षिप्त परिचय दीजिए : 

(i) तुलसीदास 

(ii) मुंशी प्रेमचंद 

 

30. निम्नांकित यातायात संकेतो का क्या अर्थ है?

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